DM Full Form In Hindi - डीएम क्या है?

DM जिसे भारत के लोग आम बोलचाल में कलेक्टर भी कहते हैं, यह भारत के किसी राज्य के जिले के प्रभारी होते हैं। यदि आप कलेक्टर यानी डीएम के बारे में जानने के लिए इच्छुक हैं, तो हम आपको यह जानकारी बता दें कि इस लेख में हमने DM Full Form In Hindi एवं डीएम यानी कलेक्टर से जुड़ी तमाम जानकारियां लिखी हैं, जो हमारे रिसर्च के अनुसार पुणे रूप से तथ्यात्मक एवं सकते हैं। ‌यदि आप वास्तव में डीएम के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें और अपने ज्ञान की वृद्धि करें।

DM

DM Full Form In Hindi

DM का अंग्रेजी Full Form “District Magistrate”‌ है, और DM का हिंदी अर्थ यानी हिंदी Full Form “जिला अधिकारी” होता है।

DM क्या है?

DM यानी ‌District Magistrate भारत के किसी राज्य के जिला का प्रभारी या अधिकारी होता है। भारत के कुछ अन्य राज्यों के जिलों में DM यानी District Magistrate को DC यानी District Collector या Deputy Commissioner भी कहा जाता है,‌ इसका अर्थ यह हुआ कि DM हो या DC दोनों किसी जिले के प्रभारी ही होते हैं।

क्या आप इस बात को जानते हैं कि भारत में कुल जिलों की संख्या कितनी है, यदि नहीं तो हम आपको बता दें कि वर्तमान में तो भारत में 28 राज्य हैं, और उन 28 राज्यों में कुल 718 जिला है, और इनमें से प्रत्येक जिला को डिस्टिक मजिस्ट्रेट द्वारा ही चलाया जाता है।

वैसे तो कहने के लिए District Magistrate और District Collector/Deputy Commissioner एक ही होते हैं, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। पर इतना सत्य है कि DM और DC दोनों ही जिले के प्रभारी होते हैं। District Magistrate और District Collector/Deputy Commissioner दोनों के कार्य में कुछ समानताएं हैं, पर दोनों में अंतर भी काफी है।

यदि आप District Magistrate और District Collector/Deputy Commissioner के कार्यों के समानता एवं अंतर के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह निम्नलिखित हैं। आप इन्हें जरूर पढ़ें और इन दोनों पद अधिकारियों के कार्य एवं कर्तव्यों के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

DM और DC के कार्य एवं कर्तव्य।

DM के कार्य एवं कर्तव्य हर राज्य के जिलों से अलग अलग है, पर DC को जिले के अधिकार क्षेत्र में कार्य एवं कर्तव्यों की बड़ी सूची है, जो निम्नलिखित है।

DM के कार्य एवं कर्तव्य।

• कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आपराधिक न्यायालय का संचालन करना।

• कानून व्यवस्था बनाए रखना।

• पुलिस को निर्देश देना।

• अपने अधीन आने वाले कार्यकारी न्यायधीश का देखरेख करना,‌ एवं मजिस्ट्रियल पूछताछ करना।

• उन मामलों पर सुनवाई करना, जो “आपराधिक प्रक्रिया संहिता की निवारक धारा“ के अंतर्गत आते हैं।

• जिले के जेलो का देखरेख करना, और अमल में लाने वाले कुंजी वाक्यों का प्रमाण करना।

• जिले के थाने, जेलो, एवं किशोर गृह का निरीक्षण करना।

• कैदी को किसी विशेष कार्य को करने की अनुमति देना।

• शस्त्र नियम के तहत किसी आम व्यक्ति को बंदूक या गोला बारूद रखने की आज्ञा देना।

• अपने जिले के न्यायधीश के साथ बातचीत करके सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी वकील की ‌ नाम की सूची तैयार करना।

• प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, सुखाड़, या महामारी की स्थिति में आपदा प्रबंधन का कार्य करना।

• दंगे की स्थिति में संकट प्रबंधन का कार्य करना।

• बाल श्रम के जुड़े मामले से निपटना।

DC के कार्य एवं कर्तव्य।

• राजस्व न्यायालय का संचालन करना।

• कब्जा किए जाने के मालिक के बीच मध्यस्थता कराना, और जमीन के मालिकों से जमीन का कर प्राप्त करना।

• आयकर बकाया, उत्पाद शुल्क, सिंचाई बकाया और उसके बकाया, आदि को‌ संग्रह करना।

• संपत्ति के दस्तावेज, विक्रय विलेख, आदि का पंजीकरण करना।

• विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र (एससी / एसटी, ओबीसी, आदि) को जारी करना।

• प्रवासी या खाली संपत्ति का संरक्षण करना।

• जिले के कार्यालय, उप प्रभाग, और तहसील का निरीक्षण करना।

DM का इतिहास।

भारत में जिला प्रशासन ब्रिटिश राज की एक विरासत है, जो बीते समय में भारतीय सिविल सेवा का सदस्य होते थे। Warren Hastings ने सबसे पहले भारत में जिला कलेक्टर का कार्यालय को 1771 में पेश किया था, Sir George Campbell बंगाल में 1871-1874 तक लेफ्टिनेंट-गवर्नर यानी District Magistrate थे। 

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