वैश्वीकरण क्या है? | वैश्वीकरण की पूर्ण जानकारी हिंदी में।

Globalization यानी वैश्वीकरण, वर्तमान में यह शब्द बड़ा ही चर्चित एवं ट्रेंडिंग विषय है। वैश्वीकरण ने आज पूरे विश्व में फैल रहा है, या फिर यूं कह दीजिए कि पूरे विश्व में फैल चुका है। यदि आप वैश्वीकरण के बारे में जानने के लिए थोड़े भी इच्छुक हैं, हम आपको बता दें कि हमने इस लेख में वैश्वीकरण क्या है, और वैश्वीकरण से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां आपके साथ साझा करने की कोशिश की है; जो हमारे रिसर्च के अनुसार को न रूप से तथ्यात्मक एवं सत्य है। यदि आप वास्तव में वैश्वीकरण के बारे में संपूर्ण महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

वैश्वीकरण

वैश्वीकरण क्या है?

विश्व के किसी देश की अर्थव्यवस्था‌ एवं संस्कृति को एक दूसरे पर निर्भर होने वैश्वीकरण कहलाता है। सरल शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि जब दो या दो से अधिक देश एक दूसरे देश की अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति पर निर्भर होते है, तो यह वैश्वीकरण कहलाता है।

वैश्वीकरण के बारे में।

वशीकरण कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जो बीसवीं शताब्दी में शुरू हुई हो। वैश्वीकरण की प्रक्रिया 18 वीं शताब्दी से चली आ रही है, क्योंकि 18 वीं शताब्दी से ही वस्तुओं का आयात और निर्यात होता आ रहा है। आयात और निर्यात की प्रक्रिया ने आज पूरे विश्व को एक दूसरे देशों पर निर्भर किया है, और इसी एक दूसरे पर निर्भरता के के कारण आज दुनियाभर के देश एक दूसरे से अपने अपने विचारों एवं संस्कृति को साझा करते हैं।

हालांकि वर्तमान में वैश्वीकरण की वजह से कितने देश एक दूसरे पर निर्भर है, और अपने देश की अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति को बेहतर से बेहतर बना रहे हैं। लेकिन एक सत्य यह भी है कि इतिहास में वैश्वीकरण से दुनिया भर में विशेष प्रकार के विवाद हुए हैं, और वर्तमान में भी इतने बड़े बड़े विवाद हो रहे हैं, या फिर आप यूं कह लो कि विवाद होते हैं।

वैश्वीकरण के प्रकार।

वर्तमान में वैश्वीकरण के विभिन्न प्रकार हैं, उनमें से तीन मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं।

• आर्थिक वैश्वीकरण

• सांस्कृतिक वैश्वीकरण

• राजनीतिक वैश्वीकरण

आर्थिक वैश्वीकरण क्या है?

आर्थिक वैश्वीकरण एक प्रक्रिया है, जो विश्व भर के देशों के अर्थव्यवस्था के विषय पर एक दूसरे पर निर्भर होने के लिए सक्षम, एवं सफल‌ बनाता है। वैश्वीकरण के मदद से कोई एक देश दूसरे देश को विभिन्न प्रकार की सेवाएं: टेक्नोलॉजी, सामान, आदि को मुहैया कराता है, एवं खुद की और विश्व की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बहुत बड़ा योगदान देता है।

संस्कृतिक वैश्वीकरण क्या है?

सांस्कृतिक वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है, जिसकी मदद से विश्व भर के देश अपने विचारों एवं मूल्यों को एक दूसरे के साथ साझा करते हैं, और देश की संस्कृति को और मजबूत बनाने में अपना योगदान देते हैं। सांस्कृतिक वैश्वीकरण का एक एक उदाहरण हमारे देश की बॉलीवुड इंडस्ट्री भी है, जो भारत की संस्कृति को दूसरे देशों को समझने में मदद करती है, और भारतीय भी दूसरे के संस्कृति को समझने के लिए विभिन्न देशों के टेलीविजन कार्यक्रम देखते हैं, एवं किताबों को पढ़ते हैं, हम यह कह सकते हैं कि यही सांस्कृतिक वैश्वीकरण की प्रक्रिया है।

राजनीतिक वैश्वीकरण क्या है?

राजनीतिक वैश्वीकरण दुनियाभर के देश एक दूसरे को राजनीति के आधार पर सहयोग करते हैं, एवं विश्व के विभिन्न देशों के राजनीतिक व्यवस्था को बढ़ाने और मजबूत बनाने में अपना-अपना योगदान देते हैं। राजनीतिक वैश्वीकरण का एक उदाहरण यह भी है, कोई व्यक्ति जो भारत देश का नागरिक हो, किसी दूसरे देश जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, आदि का भी देश का नागरिक हो सकता है। यानी राजनीतिक वैश्वीकरण में यह अधिकार दी जाती है, कि विश्व के किसी देश का कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे देश की भी नागरिकता लेकर वहां अपनी विचारों को व्यक्त कर सकता है।

वैश्वीकरण का व्युत्पत्ति और उपयोग।

वैश्वीकरण का अंग्रेजी “Globalization” शब्द सबसे पहले 1930 ईस्वी में इस्तेमाल में लिया गया था, उस समय यह शब्द केवल एक जानकारी के रूप में ही रह पाया, यज्ञ शब्द की कोई विशेष पहचान नहीं बन पाई। फिर कुछ दशकों बाद इस शब्द “Globalization” का इस्तेमाल किया गया कुछ विद्वानों और मीडिया हाउसेस के द्वारा, पर उस वक्त भी इसकी संपूर्ण परिभाषा नहीं बताई गई।

फिर जब 1960 का दशक आया, तब एक फ्रांसीसी अर्थशास्त्री “François Perroux” ने अपनी एक निबंध में mondialization/mundialization/worldization शब्द का उपयोग किया, जिसका अर्थ Globalization जानी वैश्वीकरण ही होता है। 1980 के माध्य में Globalization यानी वशीकरण शब्द में अपनी पकड़ बनाई, और तब से लेकर अब तक यह शब्द “वैश्वीकरण” चर्चित और ट्रेंडिंग रहा है।


वैश्वीकरण के बारे में एक तथ्य।

वैश्वीकरण के डर को ग्लोबोफोबिया कहते हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि अगर किसी देश को कोई नागरिक वैश्वीकरण से डर लगता है, या फिर वह वैश्वीकरण को अपनाना नहीं चाहता है; तो वह नागरिक ग्लोबोफोबिया से पीड़ित है।

यदि आपने हमारी फोबिया वाले लेख पड़ी होगी तो आप हो पिया के बारे में संपूर्ण जानकारी जरूर ही पता होगा, यदि आपने अब तक वह लिख नहीं पढ़ा है तो उसे अवश्य पढ़ें।


आशा है! आपको उपर्युक्त संपूर्ण जानकारियां ज्ञानवर्धक प्रतीत हुई होंगी, और आपको या भी जानकारी प्राप्त करनी है को प्राप्त हुई होगी की‌ वैश्वीकरण क्या है। यदि आपको हमारी यह लेख पसंद आई तो, इसे अपने मित्रों के साथ फेसबुक, व्हाट्सएप, आदी पर शेयर करके ज्ञानदीप को आपके जैसे और अधिक हिंदी पाठकों तक पहुंचने में सहायता करें।


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