URL क्या है, और यह कैसे काम करता है?

URL

URL जिसे आमतौर पर लोग Link या Web Address भी कहा करते हैं, वैसे तो आपने किसी भी वीडियो या किसी ब्लॉक का यूआरएल किसी मित्र को कभी ना कभी भेजा ही होगा। हमें अक्सर कोई जानकारी इंटरनेट के माध्यम से दूसरों तक पहुंचाने की जरूरत होती है तो हम उस जानकारी को जो वीडियो या ब्लॉग के रूप में होती है उसके URL को ही हम दूसरों को भेजते हैं और वह जानकारी पहुंचाते हैं। URL शेयर करना कोई बड़ी बात तो नहीं, पर कितने लोगों के साथ अक्सर ऐसा होता है कि वह URL को दूसरे के साथ साझा तो करते हैं पर उन्हें इस बात का ज्ञान ही नहीं होता कि URL होते क्या है? यदि आप भी URL के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस लेख को आप अंत तक अवश्य पढ़ें।

URL क्या होता है?

URL या ‌Uniform Resource Locator वेब संसाधन यानी इंटरनेट पर उपलब्ध होने वाले संसाधनों (यूट्यूब वीडियो, ब्लॉग पोस्ट, आदि) तक पहुंचने का एक जरिया है। URL की शुरुआत सर्वप्रथम Tim Berners Lee ने 1964 में की थी।

यदि आपको ऊपर दिए गए परिभाषा से यूआरएल का अर्थ समझ में नहीं आया तो चिंता करने की कोई विषय नहीं है, क्योंकि अब मैं जो आपको बताने जा रहा हूं उससे आप यह अच्छे से समझ जाएंगे कि यूआरएल क्या है।

पृथ्वी पर रहने वाले हर मानव जाति के पास अपना एक घर होता है, और यदि आपको किसी अपने मित्र के घर ही जाना होता है तो आप क्या करते हैं, कत्ल का अर्थ यह है कि आप अपने मित्र के घर जाने के लिए उसके घर का एड्रेस यानी पता पूछते हैं ताकि आप अपने मित्र के घर पहुंच पाए। ‌ठीक उसी तरह से इंटरनेट पर उपलब्ध कोई भी संसाधन जैसे कि यूट्यूब वीडियो या ब्लॉग पोस्ट इंटरनेट पर एक घर है, और यदि आपको इस घर तक पहुंचना है, और इस घर पर आकर आपको कोई जानकारी प्राप्त करनी है। तो आपके पास इस घर का पता होना जरूरी है, तभी आप डायरेक्टली इस घर तक पहुंच पाएंगें। अतः इंटरनेट पर कोई घर यानी कि कोई भी वेब संसाधन तक पहुंचने के लिए उसके यूआरएल की जरूरत होती है, तो इसका संसार किया हुआ कि यूआरएल इंटरनेट पर मौजूद कोई घर यानी वेब संसाधन का एड्रेस यानी पता है।

URL के बनावट।

URL मुख्यता: 4 पदों के बने होते हैं, एवं इन 4 पदों अलग करने के लिए Punctuation यानी विराम चिह्न का इस्तेमाल किया जाता है।

URL के पद।

१. हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल

२. उप डोमेन

३. संस्था/कंपनी का नाम

४. डोमेन एक्सटेंशन

Google एक ऐसी वेबसाइट है, जिसे इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले अधिकांश लोग इस्तेमाल में लेते ही हैं। यदि आप ने कभी गौर किया होगा तो आपने देखा होगा कि गूगल का यूआरएल https://www.google.com/ रहता है।

Google के यूआरएल https://www.google.com/ में https हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल है, www उप डोमेन है, google संस्था/कंपनी का नाम है, एवं .com डोमेन एक्सटेंशन है। इसके अलावा यदि हम google.com को इकट्ठे पढ़ें तो इसे डोमेन नाम कहां जाएगा, यानी इसका अर्थ यह हुआ कि यदि किसी यूआरएल का “संस्था/कंपनी का नाम” एवं “डोमेन एक्सटेंशन” एक साथ ले तो इसे डोमेन नाम कहा जाता है।

URL में प्रयोग होने वाले विराम चिह्न।

(.) Full Stop

(:) Colon

(/) Slash

(-) Dash

आप अपनी ज्ञान में इस बात को भी रखें की अधिकांश यूआरएल में 3 या 4 Punctuation यानी विराम चिह्न प्रयोग किया जाता है।

जैसा कि आप प्रयुक्त Google के यूआरएल में भी देख सकते हैं कि वहां केवल तीन ही विराम चिह्न का प्रयोग किया गया है, जो (.) Full Stop, (:) Colon, एवं (/) Slash है।

URL कैसे काम करता है?

उपर्युक्त जानकारियां पढ़कर आपको तो इस बात का ज्ञान हो गया होगा ही की यूआरएल के 2 पदों “संस्था/कंपनी का नाम” एवं “डोमेन एक्सटेंशन” को मिलाकर डोमेन नाम का भी एक पद होता है, जैसे कि Google.com एक डोमेन नाम है।

आप या जानकारी प्राप्त कर लीजिए कि हर एक डोमेन नाम का अपना एक आईपी एड्रेस यानी इंटरनेट प्रोटोकोल एड्रेस होता है, जिसकी सहायता से ही यूआरएल काम करता है। किसी भी डोमेन नाम का आईपी ऐड्रेस संख्या में लिखी होती है, और वह काफी बड़े यानी बहुत सारे अंको से मिलकर बने होते हैं।

दरअसल होता यूं है कि हम जैसे ही किसी URL को खोलने की कोशिश करते हैं, तो हमारा इंटरनेट ब्राउजर उस यूआरएल को DNS यानी डोमेन नेम सिस्टम से इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस यानी आईपी ऐड्रेस में बदल देता है, जिससे यूआरएल काम करती है और वेबसाइट खुल जाता है।

पर शुरुआत में इंटरनेट थी तो ऐसा नहीं था, शुरू में कोई DNS नहीं हुआ करते थे शुरू में इंटरनेट पर किसी वेबसाइट पर आने के लिए आईपी ऐड्रेस की जरूरत पड़ती थी, यानी शुरुआत में जब कोई वेबसाइट खोलना होता था तब उसका आईपी एड्रेस याद रखना पड़ता था तभी वेबसाइट खुलती थी। क्योंकि इतने लंबे ip-address को याद रखना बड़ा मुश्किल हुआ करता था, इसलिए फिर DNS बनाया गया जिससे वेबसाइट को याद रखना आसान हुआ।

निष्कर्ष।

आशा है! आपको उपर्युक्त जानकारियां ज्ञानवर्धक प्रीति हुई होंगी, एवं यह भी जानने को मिला होगा कि URL क्या है? यदि आपको हमारी यह लेख पसंद आए तो इसे अपने मित्रों के साथ फेसबुक, व्हाट्सएप, आदि पर शेयर करके ज्ञानदीप को अपने जैसे और हिंदी पाठकों तक पहुंचने में सहायता करें।

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