संज्ञा तथा सर्वनाम के बाद हिंदी व्याकरण की जानकारी के लिए क्रिया का भी ज्ञान होना आवश्यक है, इस लेख में आपको क्रिया किसे कहते हैं? एवं क्रिया के कितने भेद होते हैं? जैसे आदि प्रश्नों का उत्तर सरल शब्दों में प्राप्त करने को मिलेगा।

क्रिया किसे कहते हैं?

वैसे शब्द जिससे किसी काम को करने या होने का बोध होता है; यानी उस शब्द को पढ़ने से यह समझ आता है कि वाक्य में कोई कार्य हो रहे हैं, उन्हें क्रिया कहते हैं।

हंसना, बोलना, चलना, गाना, रोना, पीटना, लिखना, चिल्लाना, खाना, पीना, सोना, खड़ा होना, इत्यादि शब्द क्रिया है।

क्रिया के उदाहरण:

• हम लोग क्रिकेट खेलते हैं।

• सीता और गीता गीत गाती हैं।

• वे लोग गरीबों की सहायता करते हैं।

• आमिर और हुसैन स्कूल जाते हैं।

• मैं आम नहीं खाता हूं।

उपयुक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द खेलते यानी खेलना, गाती यानी गाना (Sing), सहायता करते यानी सहायता करना, जाते यानी जाना एवं खाता यानी खाना (Eat) क्रिया के उदाहरण हैं।

नोट: आप एक बात का अवश्य ध्यान रखें कि जब हिंदी में क्रिया का प्रयोग करके कोई वाक्य बनाया जाता है, तो क्रिया स्थिति के अनुसार अपना रूप बदलता रहता है।

चलिए अब हम क्रिया के प्रयोग को वाक्य में देखते हैं। हमने क्रिया का एक शब्द “खेलना” चुना है, अब हम इसे विभिन्न वाक्यों में प्रयोग करके देखेंगे।

• मैं फुटबॉल खेलता हूं।

• वे लोग फुटबॉल खेल रहे हैं।

• हमलोगों ने फुटबॉल खेला हैं।

• वह फुटबॉल खेलेगी

उपर्युक्त वाक्यों को पढ़ने से आपको यह तो समझ अवश्य आ गया होगा की क्रिया का प्रयोग वाक्य में स्थिति के अनुसार बदलता रहता है, आप खुद ही देख सकते हैं कि क्रिया “खेलना” शब्द किसी वाक्य में खेलता, खेल, खेला एवं खेलेगी में रूपांतरित (बदल) हो गया है।

नोट: वाक्य में क्रिया का प्रयोग क्रिया के शुद्ध रूप जैसे — खेलना, बोलना, चलना, हंसना, रोना, इत्यादि में नहीं होता है; वाक्य में क्रिया का प्रयोग जब भी होता है तो वह अपना रूप स्थिति के अनुसार बदल लेता है।

नोट: सारे क्रियाओ के अंत में “ना” उपस्थित होता है, लेकिन सारे हिंदी शब्द जिनके अंत में “ना” उपस्थित होता है वह क्रिया नहीं होते हैं।

चलिए अब हम “ना” वाले कंसेप्ट को निम्नलिखित उदाहरण से समझते हैं।

• मैं खाना खाता हूं।

• तुम गाना गाती हो।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द — खाता और गाती क्रिया है, एवं खाना और गाना क्रिया नहीं है, क्योंकि यह वाक्य में अन्य शब्द के रूप में प्रयोग हुए हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में खाना (Food) यानी भोजन है, और गाना (Song) यानी गीत है।

नोट: यदि किसी क्रिया में “ना” उपस्थित नहीं होता है, तो उस स्थिति में उसके लिया को धातु कहा जाता है; एवं यही रूप क्रिया का मूल रूप है।

क्रिया के मूल रूप: खेल, बोल, जा, पढ़, गा, नहा, पिट, लिख, चल, कर, डर, आदि जैसे शब्द क्रिया के मूल रूप होते हैं। अतः इन्हें ही धातु कहा जाता है।

क्रिया के कितने भेद होते हैं?

क्रिया के मुख्यत: दो भेद होते हैं, जो निम्नलिखित है।

• अकर्मक क्रिया

• सकर्मक क्रिया

अकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया में कर्म उपस्थित नहीं होता है; एवं उस क्रिया का फल खुद कर्ता पर ही पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं।

अकर्मक क्रिया के उदाहरण:

• मैं खाता हूं।

• सुबह जाता है।

• गीता सोती है।

• वे लोग आते हैं।

• राहुल गाता है।

उपयुक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द — खाता, जाता, सोती, आते, एवं गाता अकर्मक क्रिया के उदाहरण हैं; क्योंकि इन क्रियाओं में कर्म उपस्थित नहीं है, एवं क्रियाओं का फल खुद करता पर ही पड़ रहा है।

यदि हम बात करें अकर्मक क्रिया के पहले उदाहरण की तो यहां है। — “मैं खाता हूं।” इस वाक्य को पड़ने पर हमें इस बात का पता नहीं चल रहा है कि कर्ता क्या खाता है? अतः यही कारण है कि इस वाक्य में क्रिया “खाता” एक अकर्मक क्रिया है।

नोट: किसी वाक्य में अकर्मक क्रिया की जांच करने के लिए उस वाक्य में “क्या”, “कहां”, “कैसे” “क्यों” आदि जैसे शब्द लगाकर प्रश्न पूछना पड़ता है; एवं यदि “क्या”, “कहां”, “कैसे” “क्यों” आदि जैसे शब्द लगाकर प्रश्न पूछना पर‌ उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में क्रिया को अकर्मक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:

• हमलोग जाते हैं।

> हमलोग कहां जाते हैं? - (......)

आप देख सकते हैं कि उपर्युक्त उदाहरण में प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पाया, इसलिए इस स्थिति में “जाते” एक अकर्मक क्रिया है।

सकर्मक क्रिया किसे कहते हैं?

जिस क्रिया में कर्म उपस्थित होता हो, एवं उस क्रिया का फल कर्ता के जगह कर्म पर पड़े उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं।

सकर्मक क्रिया के उदाहरण:

• श्याम पुस्तक पढ़ता है।

• हमलोग प्रतिदिन गया जाते हैं।

• वे लोग गरीबों की सहायता करते हैं।

• मैं साइकिल चलाता हूं।

उपयुक्त वाक्यों में प्रयुक्त होने वाले शब्द — पड़ता, जाते, करते एवं चलाता सकर्मक क्रिया के उदाहरण; क्योंकि इन क्रियाओं के साथ कर्म उपस्थित है एवं इन क्रियाओं का फल करता के जगह कर्म पर पड़ रहा है।

सकर्मक क्रिया के पहले उदाहरण “श्याम पुस्तक पढ़ता है।” को यदि हम गौर से देखें तो हमें यह ज्ञात हो रहा है कि “श्याम क्या पड़ता है?” अतः इसी कारण पढ़ता एक सकर्मक क्रिया है।

नोट: किसी वाक्य में सकर्मक क्रिया की जांच करने के लिए उस वाक्य में “क्या”, “कहां”, “कैसे” “क्यों” आदि जैसे शब्द लगाकर प्रश्न पूछना पड़ता है; एवं यदि “क्या”, “कहां”, “कैसे” “क्यों” आदि जैसे शब्द लगाकर प्रश्न पूछना पर‌ उत्तर प्राप्त होता है, तो ऐसी स्थिति में क्रिया को सकर्मक क्रिया कहते हैं।

उदाहरण:

• गीता रामायण पढ़ती है‌।

> गीता क्या पढ़ती है? - (रामायण)

आप देख सकते हैं कि उपर्युक्त उदाहरण में प्रश्न पूछने पर हमें उत्तर प्राप्त हो चुका है, इसलिए इस स्थिति में “पढ़ती” एक सकर्मक क्रिया है।

व्युत्पत्ति की दृष्टि से क्रिया के कितने भेद होते हैं?

व्युत्पत्ति की दृष्टि से क्रिया के मुख्यत: चार भेद होते हैं, जो निम्नलिखित है।

• मूल क्रिया

• प्रेरणार्थक क्रिया

• नामधातु क्रिया

• संयुक्त क्रिया

मूल क्रिया किसे कहते हैं?

क्रिया का वह रूप जिसमें धातु अपने मूल रूप में उपस्थित रहता है, उसे मूल क्रिया कहते हैं।

मूल क्रिया के उदाहरण:

• हमलोग चल रहे हैं।

• वेलोग पंछियों को दाना दे रहे हैं।

• सीता कविता लिख रही है।

• श्याम मुझे पीट रहा है।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द — चल, दे, लिख एवं पिट मूल क्रिया के उदाहरण हैं; क्योंकि उपर्युक्त क्रियाओं के अंत में “ना” उपस्थित नहीं है।

प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं?

वैसे क्रियाए जिससे यह ज्ञात किया जा सके कि कर्ता खुद से काम ना करके, अपनी प्रेरणा की सहायता से किसी दूसरे व्यक्ति या अन्य व्यक्ति से कराएं; उन्हें प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।

प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण:

• राम अपना काम श्याम से करवाता है।

• गीता सीता से रोटी पकवाती है।

• मैं सोहन से पानी भरवाता था।

• मैं तुम से कविता लिखवाता था।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द करवाता, पकवाती, भरवाता एवं लिखवाता प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण हैं; क्योंकि इन क्रियाओं को पढ़ने पर ऐसा प्राप्त होता है कि करता कार्य स्वयं नहीं बल्कि किसी अन्य से करवा रहा है।

नामधातु क्रिया किसे कहते हैं?

जो धातु यानी क्रिया संज्ञा या विशेषण के सहायता से बनती है, उन्हें नामधातु क्रिया कहते हैं।

नामधातु क्रिया के उदाहरण:

• राहुल मेरी जमीन हथियाना चाहता है।

• हमलोग उस चोर को लतियाना चाहते हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द हथियाना एवं ‌लतियाना नामधातु क्रिया है, क्योंकि इनका निर्माण संज्ञा — हाथ एवं लात से हुआ है।

• मुझे आज जमीन की मिट्टी चिकनाना है।

• राम को अपनी हाथ आग में ताप पर गर्माना है।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयोग होने वाले शब्द चिकनाना एवं ‌गर्माना नामधातु क्रिया है, क्योंकि इनका निर्माण विशेषण — चिकना एवं गर्म से हुआ है।

संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

वैसे क्रियाए जो 2 से अधिक धातु यानी क्रियाओं से बनी होती है, उन्हें संयुक्त क्रिया कहते हैं।

संयुक्त क्रिया के उदाहरण:

• राहुल अंग्रेजी की पुस्तक पढ़ने लगा

• एक के बाद एक झूठ कहता गया

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त होने वाले शब्द — पढ़ने लगा एवं कहता गया संयुक्त क्रिया के उदाहरण हैं, क्योंकि उपयुक्त क्रियाएं दो धातु यानी क्रिया (पढ़ने + लगा) और (कहता + गया) से मिलकर बना है।

निष्कर्ष।

क्रिया की परिभाषा, भेद और उदाहरण को पढ़ने के बाद अब तक आपके क्रिया के विषय में सारे प्रश्न का उत्तर प्राप्त हो गया होगा; यदि अभी भी आपके पास क्रिया के संबंध में कोई प्रश्न हो तो आप उसे कमेंट करके अवश्य पूछें।

क्रिया किसे कहते हैं?