समास की परिभाषा (Samas Ki Pribhasa) और उसकी संपूर्ण जानकारी।

समास अन्य पाठों की तरह हिंदी व्याकरण का एक पाठ है, यदि आप समास के विषय में संपूर्ण जानकारियां जैसे — समास किसे कहते हैं?, समास के कितने भेद होते हैं? आदि प्राप्त करना चाहते हैं तो आप इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

समास किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक पदों या शब्दों के जोड़ने से जो नया शब्द प्राप्त होता है, उस शब्द को समास कहा जाता है।

नोट (क): समास का सरल अर्थ “संक्षेप” यानी “सिमटे हुए रूप में” होता है; दो या दो से अधिक शब्दों को जोड़ने को ही “संक्षेप” कहते हैं, इससे यह तत्पर्य है कि कम से कम शब्दों का प्रयोग करके अधिक से अधिक बातें कहीं जा सके।

नोट (ख): समास बनाने की स्थिति में पदों या शब्दों के बीच का विभक्ति चिह्न — का, को, से, ने, आदि हट जाता है।

समास का उदाहरण:

देश का भक्त - देशभक्त

शत्रु को मारने वाला - शत्रुघ्न

सभा का पति - सभापति

आत्मा पर निर्भर - आत्मनिर्भर

कर्म से हीन - कर्महीन

धर्म में वीर - धर्मवीर

आकाश को चुनने वाला - आकाशचुंबी

जेब के खर्च के लिए - जेबखर्च

लोहे के सामान पुरुष - लौहपुरुष

बिना खबर का - बेखबर

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द — देशभक्त, शत्रुघ्न, सभापति, आत्मनिर्भर, कर्महीन, धर्मवीर, आकाशचुंबी, जेब खर्च, लौहपुरुष एवं बेखबर समास के उदाहरण है; क्योंकि इन शब्दों का निर्माण दो या दो से अधिक पदों या शब्दों को जोड़ने एवं विभक्ति चिह्न को हटाने से हुआ है।

सामासिक शब्द या समस्तपद किसे कहते हैं?

समास के नियमों के अनुसार बनने वाले नए शब्दों को सामासिक शब्द या समस्तपद कहते पर हैं। जैसे — देशभक्त, शत्रुघ्न, सभापति, आत्मनिर्भर, आदि सामासिक शब्द या समस्तपद है; क्योंकि इनका निर्माण समास के नियमों के अनुसार हुआ है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामासिक शब्द या समस्तपद में 2 पद होते हैं, जो — पूर्वपद एवं उत्तरपद हैं।

पूर्वपद किसे कहते हैं?

समास के नियम से निर्मित सामासिक शब्द या समस्तपद के पहले पद को पूर्वपद कहा जाता है।

पूर्वपद के उदाहरण:

देशभक्त - देश + भक्त

सभापति - सभा + पति

आत्मनिर्भर - आत्म + निर्भर

कर्महीन - कर्म + हीन

धर्मवीर - धर्म + वीर

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द देश, सभा, आत्म, कर्म एवं धर्म पूर्वपद के उदाहरण हैं; क्योंकि यह सामासिक शब्द या समस्तपद के प्रथम पद हैं।

उत्तरपद किसे कहते हैं?

समास के नियम से निर्मित सामासिक शब्द या समस्तपद के दूसरे पद को पूर्वपद कहा जाता है।

उत्तरपद के उदाहरण:

रसभरा - रस + भरा

जेबखर्च - जेब + खर्च

मनमस्त - मन + मस्त

कामचोर - काम + चोर

महाकवि - महा + कवि

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द भरा, खर्च, मस्त, चोर एवं कवि उत्तरपद के उदाहरण है; क्योंकि यह सामासिक शब्द या समस्तपद का दूसरा पद हैं।

समास-विग्रह किसे कहते हैं?

सामासिक शब्दों या समस्तपदो के बीच के संबंध को प्रकट करने को समास-विग्रह कहते हैं।

समास-विग्रह के उदाहरण:

मनमस्त - मन से मस्त

कन्यादान - कन्या का दान

देशभक्ति - देश के लिए भक्ति

सेनापति - सेना का पति

राजदरबार - राजा का दरबार

उपर्युक्त उदाहरण में प्रयुक्त वाक्य — मन से मस्त, कन्या का दान, देश के लिए भक्ति, सेना का पति एवं राजा का दरबार समास-विग्रह है; क्योंकि यह सामासिक शब्दों या समस्तपदो — मनमस्त, कन्यादान, देशभक्ति, सेनापति एवं राजदरबार के बीच का संबंध प्रकट कर रहा है।

समास के कितने भेद होते हैं?

अर्थ की दृष्टि से समास के मुख्यत: 6 भेद होते हैं, जो निम्नलिखित है।

तत्पुरुष समास

कर्मधारय समास

बहुव्रीहि समास

द्वंद्व समास

दिगु समास

अव्ययीभाव समास

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे समास जिनका अंतिम पद प्रधान पद के रूप में कार्य करता है, उन्हें तत्पुरुष समास कहते हैं।

तत्पुरुष समास के उदाहरण:

राजपुत्र - राजा का पुत्र

रसभरा - रस से भरे

रोगमुक्त - रोग से मुक्त

यशोदा - यश को देनेवाली

प्रेममग्न - प्रेम में मग्न

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयोग होने वाले शब्द — पुत्र, भरे, मुक्त, देनेवाली एवं मग्न तत्पुरुष समास के उदाहरण है; क्योंकि इनका अंतिम पद प्रधान पद के रूप में कार्य कर रहा है।

तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं?

तत्पुरुष समास के मुख्यत: 6 भेद होते हैं।

कर्मतत्पुरुष समास

करणतत्पुरुष समास

सम्प्रदानतत्पुरुष समास

अपादानतत्पुरुष समास

सम्बन्धतत्पुरुष समास

अधिकरणतत्पुरुष समास

कर्मतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “को” के लोप होने से होता है, उन्हें कर्मतत्पुरुष समास कहते हैं।

कर्मतत्पुरुष समास के उदाहरण:

शत्रु को मारनेवाला - शत्रुहन

यश को देनेवाली - यशोदा

उपर्युक्त उदाहरणों में शत्रुहन और यशोदा कर्मतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “को” के लोप से हो रहा है।

करणतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “से” या “के द्वारा” के लोप होने से होता है, उन्हें करणतत्पुरुष समास कहते हैं।

करणतत्पुरुष समास के उदाहरण:

रसभरा - रस से भरा

मानवरचित - मानव के द्वारा रचित

उपर्युक्त उदाहरणों में रसभरा और मानवरचित करणतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “से” या “के द्वारा” के लोप से हो रहा है।

सम्प्रदानतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “के लिए” के लोप होने से होता है, उन्हें सम्प्रदानतत्पुरुष समास कहते हैं।

सम्प्रदानतत्पुरुष समास के उदाहरण:

जेबखर्च - जेब के लिए खर्च

विधालय - विधा के लिए आलय

उपर्युक्त उदाहरणों में जेबखर्च और विधालय करणतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “के लिए” के लोप से हो रहा है।

अपादानतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “से” के लोप होने से होता है, उन्हें अपादानतत्पुरुष समास कहते हैं।

अपादानतत्पुरुष समास के उदाहरण:

पदभ्रष्ट - पद से भ्रष्ट

रोगमुक्त - रोग से मुक्त

उपर्युक्त उदाहरणों में पदभ्रष्ट और रोगमुक्त अपादानतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “से” के लोप से हो रहा है।

सम्बन्धतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “का”, “के”, “की” आदि के लोप होने से होता है, उन्हें सम्बन्धतत्पुरुष समास कहते हैं।

सम्बन्धतत्पुरुष समास के उदाहरण:

सभापति - सभा का पति

कन्यादान - कन्या का दाम

उपर्युक्त उदाहरणों में सभापति और कन्यादान सम्बन्धतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “का”, “के”, “की” आदि के लोप से हो रहा है।

अधिकरणतत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

वैसे तत्पुरुष समास जिसका निर्माण “में” या “पर” के लोप होने से होता है, उन्हें अधिकरणतत्पुरुष समास कहते हैं।

अधिकरणतत्पुरुष समास के उदाहरण:

आनंदमग्न - आनंद में मगन

धर्मवीर - धर्म में वीर

उपर्युक्त उदाहरणों में आनंदमग्न और धर्मवीर सम्बन्धतत्पुरुष समास है, क्योंकि इनका निर्माण “में” या “पर” के लोप से हो रहा है।

कर्मधारय समास किसे कहते हैं?

जिस समास का प्रथम पद विशेषण तथा अंतिम पद विशेष्य होता है, उन्हें कर्मधारय समास कहते हैं।

कर्मधारय समास के उदाहरण:

महाकवि - महान है जो कवी

नररत्न - नर रत्न के सामान

सज्जन - सत् जन

नरसिंह - नर सिंह के सामान

पद पंकज - पद पंकज के सामान

कमलनयन - कमल के समान नयन

उपयुक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द महाकवि, नररत्न, सज्जन, नरसिंह, पद पंकज एवं कमलनयन कर्मधारय समास है, क्योंकि इनका पहला पद विशेषण एवं अंतिम पद विशेष्य हैं।

बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं?

वैसे समास जिसका कोई भी पद प्रधान पद नहीं होता है, उन्हें बहुव्रीहि समास कहते हैं।

बहुव्रीहि समास के उदाहरण:

दशमुख - दस है मुख जिसके

चतुर्भुज - चार है भुजाएं जिसके

दिगंबर - दिक् है अंबर जिसका

चंद्रशेखर - चंद्र है शेखर पर जिसके

उपर्युक्त उदाहरणों में देशमुख, चतुर्भुज, दिगंबर एवं चंद्रशेखर बहुव्रीहि समास के उदाहरण है, क्योंकि इनका कोई भी पद प्रधान नहीं है।

द्वंद्व समास किसे कहते हैं?

वैसे समास जिसके दोनों पद प्रधान पद होता है, उन्हें द्वंद्व समास कहते हैं।

नोट: द्वंद्व समास के निर्माण में “और”, “अथवा”, या “एवं” का लोप होता है।

द्वंद्व समास के उदाहरण:

राधाकृष्ण - राधा और कृष्ण

एड़ी-चोटी - एड़ी और चोटी

पिता-पुत्र - पिता और पुत्र

भला-बुरा - भला और बुरा

उपर्युक्त उदाहरणों में राधाकृष्ण, एड़ी-चोटी, पिता-पुत्र एवं भला-बुरा बहुव्रीहि समास के उदाहरण है, क्योंकि इनका दोनों पद प्रधान पद है।

दिगु समास किसे कहते हैं?

वैसे समास जिसका का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है, उन्हें दिगु समास कहते हैं।

दिगु समास के उदाहरण:

त्रिनेत्र - तीन मित्रों का समाहार

पंचदेव - 5 दिनों का समाहार

शताब्दी - 100 वर्षों का समूह

दोपहर - दो पहरो का समाहार

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द — त्रिनेत्र, पंचदेव, शताब्दी एवं दोपहर दिगु समास है, क्योंकि उनका पहला पद संख्यावाचक विशेषण का है।

अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं?

वैसे समास जिसका पहला पद अव्यय होता है, एवं बचा हुआ समस्त पद क्रियाविशेषण अव्यय होता है; उन्हें अव्ययीभाव समास कहते हैं।

अव्ययीभाव समास के उदाहरण:

भरपेट - पेट भर कर

रातभर - भर रात

बेखबर - बिना खबर का

यथार्थ - अर्थ के अनुसार

उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द — भरपेट, रातभर, बेखबर एवं यथार्थ अव्ययीभाव समास है, क्योंकि उनका पहला पद अव्यय एवं बचा हुआ समस्त पद क्रियाविशेषण अव्यय है।

समास

समास की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण की संपूर्ण जानकारी अब आपको‌ प्राप्त हो चुकी होगी, यदि समास के विषय में आपसे कोई प्रश्न हो तो आप कमेंट करके आवश्यक पुछे।

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